कश्मीर से कन्याकुमारी तक सिर्फ तिरंगा - डॉ रचना सिंह "रश्मि"

 


 



 


सही अर्थों में आज जम्मू-कश्मीर को आजादी मिली है।गौरवशाली इतिहास का ये स्वर्ण पल हमारे मन मस्तिष्क में हमेशा अंकित रहेगा।आज जन संघ के समय से संजोया हुआ करोड़ो  भारतीयों का सपना साकार हुआ है। नरेंद्र मोदी सरकार ने कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने  राज्यसभा में कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल पेश कर दिया है।जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटा दी गई है। जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। साथ ही लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग किया गया है। जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 के कानून बनने के बाद जम्मू-कश्मीर का मानचित्र पूरा बदल जाएगा। साथ ही लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग किया गया है।लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सामरिक दृष्टि से अहम करगिल जिला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा नहीं रह जाएगा। लद्दाख के अलग होने से तेज़ी से विकास होगा और जनता के जीवन में खुशहाली आएगी।



जम्मू-कश्मीर के साथ  लद्दाख  केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद अब देश में कुल 9 केंद्र शासित प्रदेश हो गए हैं। एक झंडा-एक संविधान प्रभावी हो जाएगा। अब कश्मीर के विकास का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सही अर्थों में आज जाकर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत एक सूत्र में बंध.गया है  इससे कश्मीरी लोगों का भी .भविष्य  संवरेगा। राज्य में जहां शिक्षा, व्यापार, उद्योग को बढ़ावा मिलेगा वहीं आतंकी घुसपैठ रोकने में सफलता मिलेगी। देश की सीमा सुरक्षित होगी। आर्टिकल 370 और 35A हटने के बाद जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन जायेगा। पर्यटन व्यवसाय जुड़ी कंपनियां के जाने से कश्मीरियों को रोजाना मिलेगा पर्यटन बढ़ेगा. अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं लेकिन370 के  कारण ये संभव नहीं था 370 के कारण जम्मू कश्मीर में देश का कोई बड़ा डॉक्टर नहीं जाना चाहता, क्योंकि वहां वो अपना घर नहीं खरीद सकता, वहां का मतदाता नहीं बन सकता और वहां खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करता.अब देश का कोई भी नागरिक कश्मीर में भी जमीन लेकर वहां अपना व्यवसाय कर सकता है और वहां रहना चाहे तो रह सकता है।



क्या है अनुच्छेद 370


 


आर्टिकल 370 है क्‍या और इसके हटाने के क्‍या मायने है? संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित कानून को लागू करवाने के लिए केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए। इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती। इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्‍त करने का अधिकार नहीं है। जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती है। भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है। जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग है. वहां के नागरिकों द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना अनिवार्य नहीं है। इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है. यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते।



भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती। जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं। कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है। कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं है। जम्मू-कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाएगी. इसके विपरीत अगर पकिस्तानी किसी कश्मीरी महिला से विवाह कर लेता धारा 370 की वजह से  जम्मू-कश्मीर के साथ भारतीय नागरीकता मिल जाती है । धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते हैं।



जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले चपरासी को आज भी ढाई हजार रूपये ही बतौर वेतन मिलते हैं। कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16 फीसदी आरक्षण नहीं मिलता है। अनुच्छेद 35ए, 1954 में इसे संविधान में जोड़ा गया था। इसके अनुसार जम्मू-कश्मीर विधानसभा को राज्य के 'स्थायी निवासी' की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। अस्थायी नागरिक जम्मू-कश्मीर में न स्थायी रूप से बस सकते हैं और न ही वहां संपत्ति खरीद सकते हैं। उन्हें कश्मीर में सरकारी नौकरी और छात्रवृत्ति भी नहीं मिल सकती। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़े से बड़े मसले का हल किया जा सकता है। मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने से कश्मीरी जनता को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ने वाले इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रपति एवं गृह मंत्री अमित शाह का यह ऐतिहासिक निर्णय स्वागत योग्य है जम्मू-कश्मीर का देश में विलय हुआ है। अब एक ही देश में दो निशान व दो संविधान नहीं रहेंगे, बल्कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तिरंगा शान से लहराएगा। 


 



प्रस्तुति


डॉ रचना सिंह "रश्मि"


आगरा उत्तर प्रदेश