“अच्छे मन से किया हुआ संकल्प कभी अधूरा नहीं रहता : पं. देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज”


“विनाश नहीं विकास का जो मार्गदर्शन है वो सनातनियों ने ही दिया है : पं. देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज”


युवा गौरव। संवाददाता


कानपुर। विश्व शांति सेवा समिति कानपुर एवं विश्व शांति सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में 30 अक्टूबर से 05 नवंबर 2019 तक मोतीझील ग्राउंड में कथा वाचक पं. देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के मुखारबिंद से राम मंदिर के लिए संकल्पित श्री राम कथा का आयोजन किया जा रहा है।  तीसरे दिन हजारों की संख्या में भक्तों ने महाराज श्री के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया। श्री राम कथा के तीसरे दिन की शुरुआत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। कथा पंडाल में कानपुर से सांसद श्री सत्यदेव पचौरी जी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई एवं महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। संस्था की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। पं. देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा की भगवान श्री राम समस्त मानव जाती के कल्याण के लिए इस धराधाम पर अवतरित हुए थे। ये दुखद विषय ही है की अयोध्या में राम मंदिर बने या ना बने या वो भूमि किसकी है। ये एक इतिहास है की कुछ बाहरी लुटेरे आए जिन्होंने भारत में मंदिर तोड़े, हम लोगों को ठेस पहुंचाई। पूरे संसार ने चाहे जितनी भी प्रगति की हो, सांसारिक लोगों ने प्रगति करके केवल विनाश की चीजें ही एकत्रित्र की हैं, लेकिन हमारे भारत ने, भारत के ऋषियों ने, भारत के प्रबुद्ध जीवों ने और तो और बार बार अवतार लेकर भगवान ने भी किस तरह से बाहरी नहीं भीतर विकास किया जाए ये हमारे भगवान, हमारे ऋषियों ने ही समझाया। विनाश नहीं विकास का जो मार्गदर्शन है वो सनातनियों ने ही दिया है और इस बात को पूरी दुनिया मानती भी है की सनातनियों ने शांति के साथ शांतिप्रद विकास, ज्ञान का प्रकाश हम सब को प्रदान किया है। महाराज श्री ने आगे कहा कि आज जो लोग इस बात को कहते हैं की हम धर्म को नहीं मानते, भगवान को नहीं मानते उनको क्या मिला? चाहे पहले की राम द्रोही हों, चाहे अब के राम द्रोही हों, रोना पहले भी पड़ा था, रोना अब भी पड़े रहा है यह निश्चित है। जो राम को नहीं मानते, राम की नहीं मानते उनकी चाहे लंका सोने की हो लेकिन वहां का माहौल अच्छा नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि ज्ञान मार्ग दो धारी तलवार है, इसमे चलना कठीन है, इस मार्ग पर चलने वालों को अनेक प्रकार की लौकिक सिद्धियां के लालच में लाता है, मोह मिटाता है, माया जाल फैलाता है, अधिकांश ऐसा देखने में आता है की काम पर विजय पाने वालों को काम की कीर्ति में फसा देती है यह संसार, यह माया। महाराज श्री ने आगे  कहा कि ये जो संसार है ये गिने चुने दो चार कामों में ही व्यस्त है, खाओ, कमाओ, बच्चे पालो और सो जाओ इसके अलावा जीव कुछ नहीं कर पाता है। इतना अनमोल जीवन है, हर एक चीज अनमोल है, उसके बावजूद भी इस जीवन को हम व्यर्थ गवाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। कोई अच्छे उद्देश्य के साथ कोई काम कर रहा हो तो हम उसमें भी उसका साथ नहीं दे सकते। भगवान श्री राम अकेले केवल एक भारतीय के नहीं है, वो पूरी मानवता के हैं। जो मानवता में अच्छाई देखता है भगवान श्री राम उसके लिए सबसे बड़ी धरोहर हैं इस विश्व की। राम आत्मा, राम परमात्मा ऐसे राम का गुणगान करिए। उन भगवान श्री राम के मंदिर का निर्माण हो ऐसी प्रार्थना तो हम और आप कर सकते हैं। अगर कोई मनोरथ हम पूरे ध्यान से करते हैं तो देर से ही सही पर उस मनोरथ में भगवान पूरा जरूर करते हैं, अच्छे मन से किया हुआ संकल्प कभी अधूरा नहीं रहता, आपको अच्छे मन से संकल्प करना चाहिए । कार्यक्रम में सर्व श्री वीरेंद्र गुप्ता, बिपिन बाजपेई, सतीश गुप्ता, शिव शरण वर्मा, राम गोपाल बांग्ला, सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी, निरंकार गुप्ता, मंजू शुक्ला, डॉक्टर यू पी सिंह, नीलम सेंगर, प्रभा शंकर वर्मा, राम विनय यादव, माया सिंह, अजय मिश्रा, अनिल श्रीवास्तव, विमला दीक्षित, राजेश गुप्ता, संजीत मंडल, संजीव पटेल, पूनम पांडेय, अनुज अवस्थी, किरण तिवारी, आभा गुप्ता, सुमन गुप्ता, प्रीति मिश्रा, रविंद्र यादव आदि समस्त समिति के सदस्य उपस्थित रहे।